kya roke qaza ke vaar taweez | क्या रोके क़ज़ा के वार तावीज़

  - Ameer Minai
क्यारोकेक़ज़ाकेवारतावीज़
क़िल'अहैकुछहिसारतावीज़
चोटीमेंहैमुश्क-बारतावीज़
याफ़ित्ना-ए-रोज़गारतावीज़
दोनोंनेदर्द-ए-दिलमिटाया
गंडेकाहैरिश्ता-दारतावीज़
क्यानाद-ए-अलीमेंभीअसरहै
चारोंटुकड़ेहैंचारतावीज़
डरताहूँसुब्हहोशब-ए-वस्ल
हैमहरवोज़र-निगारतावीज़
हमकोभीहोकुछउमीद-ए-तस्कीं
खोएजोतप-ए-ख़यारतावीज़
पत्तांकोजड़हमारीपहुँची
गाड़ातह-ए-पा-ए-यारतावीज़
हाजतनहींउनकोनौ-रतनकी
बाज़ूपेहैंपाँचचारतावीज़
खटकेवोआएफ़ातिहेको
देखाजोसर-ए-मज़ारतावीज़
पीजाएँगेघोलकरकिसेआप
हैनक़्शख़ाकसारतावीज़
तुर्कटलेंबलाएँसरसे
इकतेग़काख़त-ए-हज़ारतावीज़
डरहैतुम्हेंकंकनोंसेलाज़िम
लायातोहैसादा-कारतावीज़
इक्सीरकानुस्ख़ाइसकोसमझूँ
खोएजोतिराग़ुबारतावीज़
मजमाहै'अमीर'कीलहदपर
मेलेकाहैइश्तिहारतावीज़
  - Ameer Minai
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy