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Ravi 'VEER'
dar mujhe meri muhabbat ek din kho jaayegi
dar mujhe meri muhabbat ek din kho jaayegi | डर मुझे मेरी मुहब्बत एक दिन खो जाएगी
- Ravi 'VEER'
डर
मुझे
मेरी
मुहब्बत
एक
दिन
खो
जाएगी
यार
मुझको
लग
रहा
वो
ग़ैर
की
हो
जाएगी
मैं
सभी
वादे
पुराने
ही
निभाते
जाऊँगा
और
वो
जाकर
किसी
की
बाँह
में
सो
जाएगी
- Ravi 'VEER'
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वो
कभी
आग़ाज़
कर
सकते
नहीं
ख़ौफ़
लगता
है
जिन्हें
अंजाम
से
Siraj Faisal Khan
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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कुछ
न
था
मेरे
पास
खोने
को
तुम
मिले
हो
तो
डर
गया
हूँ
मैं
Nomaan Shauque
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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बच्चों
तुम्हीं
बताओ
कि
मईया
कहाँ
गई
रस्ते
में
छोड़कर
ये
सुरईया
कहाँ
गई
इन
रक्षकों
के
ख़ौफ़
से
घर
में
छुपा
हूँ
मैं
पूछेंगे
ये
ज़रूर
कि
गईया
कहाँ
गई
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Paplu Lucknawi
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शग़्ल
था
दश्त-नवर्दी
का
कभी
ऐ
'ताबाँ'
अब
गुलिस्ताँ
में
भी
जाते
हुए
डर
लगता
है
Anwar Taban
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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तेरे
दर
पर
तेरी
ख़ातिर
बता
ना
हमें
रोना
पड़े,
अच्छा
लगेगा?
Atul K Rai
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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जिस
तरह
पत्ते
गिरे
है
शाख़
से
ठीक
वैसे
ही
गिरा
हूँ
यार
मैं
नासमझ
था
मैं
बहुत
पहले
मगर
अब
बहुत
ही
सरफिरा
हूँ
यार
मैं
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Ravi 'VEER'
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अगर
खुशियाँ
मुकद्दर
में
रही
तो
ग़म
भी
आएँगे
अगर
आएँगे
हिस्से
ज़ख़्म
तो
मरहम
भी
आएँगे
Ravi 'VEER'
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फ़क़त
इज़हार
करना
भी
मेरे
बस
में
नहीं
यारों
वो
ताज़े
फूल
की
शौक़ीन
मैं
सूखा
बगीचा
हूँ
Ravi 'VEER'
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क्या
भला
दिन
रात
रोना,
यार
बदलो
कुछ
नहीं
रक्ख़ा
ग़मों
में
सार,
बदलो
साल
बदला
है,
सुनो
अब
तुम
भी
अपना
रंग
बदलो,
चाल
बदलो,
प्यार
बदलो
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Ravi 'VEER'
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वो
बदलता
जा
रहा
है
सूरतें
अपनी
मगर
मैं
चलाता
जा
रहा
हूँ
काम
इक
तस्वीर
से
शहर
को
बदले
उसे
तो
इक
ज़माना
हो
गया
अब
भला
क्या
काम
उसको
गाँव
बैठे
'वीर'
से
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Ravi 'VEER'
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