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Atul K Rai
tere dar par teri khaatir bataa naha
tere dar par teri khaatir bataa naha | तेरे दर पर तेरी ख़ातिर बता ना
- Atul K Rai
तेरे
दर
पर
तेरी
ख़ातिर
बता
ना
हमें
रोना
पड़े,
अच्छा
लगेगा?
- Atul K Rai
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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ख़ौफ़
आता
है
अपने
साए
से
हिज्र
के
किस
मक़ाम
पर
हूँ
मैं
Siraj Faisal Khan
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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इस
ख़ौफ़
में
कि
ख़ुद
न
भटक
जाएँ
राह
में
भटके
हुओं
को
राह
दिखाता
नहीं
कोई
Anwar Taban
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हमारे
जैसा
कोई
दर-ब-दर
नहीं
होगा
कहीं
पे
होगा
भी
तो
इस
कदर
नहीं
होगा
निकल
गया
हूँ
क़ज़ा
के
परे
तो
मैं
कबका
दे
जहर
भी
कोई
तो
अब
असर
नहीं
होगा
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Aadi Ratnam
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सखियों
संग
रँगने
की
धमकी
सुनकर
क्या
डर
जाऊँगा
तेरी
गली
में
क्या
होगा
ये
मालूम
है
पर
आऊँगा
Kumar Vishwas
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हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
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Asrar Ul Haq Majaz
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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उसे
ज़ियादा
ज़रूरत
थी
घर
बसाने
की
वो
आ
के
मेरे
दर-ओ-बाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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पहले
सौ
बार
इधर
और
उधर
देखा
है
तब
कहीं
डर
के
तुम्हें
एक
नज़र
देखा
है
Majrooh Sultanpuri
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क़र्ज़
लदेगा
लड़की
के
बाबूजी
पर
बाप
मगर
लड़के
का
बेंचा
जाएगा
Atul K Rai
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कोई
तो
है
चिढ़ाता
है
जो
मुझको
मैं
आईने
में
जब
भी
देखता
हूँ
Atul K Rai
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एक
अकेले
की
ख़ातिर
जब
दो
कप
कॉफी
में
चीनी
आज
मिलाते
हैं
तो
रो
देते
हैं
हम
Atul K Rai
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दुनिया
ने
तो
सीधे
सीधे
पागल
बोल
दिया
पढ़
कर
मेरे
माथे
पर
जो
लिक्खा
है
पढ़
पाओगी
लड़की
कल
भी
देखा
अब
भी
देख
रहे
हैं
कल
भी
देखेंगे
कितने
रोज़
बहानों
से
बस
काम
चलाओगी
लड़की
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Atul K Rai
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बहारें
हों
या
वीरानी
से
सब
जंगल
गुज़रते
हैं
रुदन
हो
हास्य
हो
सबको
बराबर
बाँटता
है
वो
Atul K Rai
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