ga.e guzre dinon ki yaad ka nashsha abhii tak hai | गए गुज़रे दिनों की याद का नश्शा अभी तक है

  - Amardeep Singh
गएगुज़रेदिनोंकीयादकानश्शाअभीतकहै
मेरेपैमाना-ए-दिलमेंकोईसहबाअभीतकहै
छलकपड़तेहैंआँसूआँखसेइकमोड़मुड़तेही
पुरानेघरकीगलियोंसेमिरारिश्ताअभीतकहै
कू-ए-यारतूशायदउसेअबभूलबैठीहो
मगरतेरेसबबसेशख़्सइकरुस्वाअभीतकहै
तसव्वुरहीकीदुनियाथीख़यालोंहीमेंरहतेथे
यक़ींसेकमनहींथाजोवहीधोकाअभीतकहै
इन्हीआँखोंसेगुज़राहैवोहरमंज़रजोकहतीहैं
सरासरवहमथावोसबकेजोदेखाअभीतकहै
येघरउसशख़्सकीमेहनतकोअबतकख़र्चकरताहै
जोसालोंपहलेमरकरभीकहींज़िंदाअभीतकहै
मसाइलकुछभीहोंलेकिनमुझेकबफ़िक्रथीकोई
थेवोभीदिनमैंकहताथामिराअब्बाअभीतकहै
मोहब्बतकीभलाइससेबड़ीतस्दीक़क्याहोगी
मुसलमानोंकीबस्तीमेंजोमंदिरथाअभीतकहै
बुराकहतीहैगरदुनियाहमेंतोमसअलाक्याहै
हमेंतोफ़िक्रहैउसकीकिजोअच्छाअभीतकहै
हुजूम-ए-दोस्ताँहरसूहैलेकिनबावजूदइसके
'अमर'क्याबातहैआख़िरजोतूतन्हाअभीतकहै
  - Amardeep Singh
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy