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Fahmi Badayuni
khun pila kar jo she'r paala thaus ne circus men naukri kar li
khun pila kar jo she'r paala thaus ne circus men naukri kar li | ख़ूँ पिला कर जो शे'र पाला था
- Fahmi Badayuni
ख़ूँ
पिला
कर
जो
शे'र
पाला
था
उस
ने
सर्कस
में
नौकरी
कर
ली
- Fahmi Badayuni
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मैं
ने
मेहनत
से
हथेली
पे
लकीरें
खींचीं
वो
जिन्हें
कातिब-ए-तक़दीर
नहीं
खींच
सका
Umair Najmi
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हमारे
गाँव
में
अब
भी
ये
रस्म
क़ायम
है
बड़ों
के
हाथ
में
बच्चे
कमाई
देते
हैं
Irshad 'Arsh'
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ख़ुद
जिसे
मेहनत
मशक़्क़त
से
बनाता
हूँ
'जमाल'
छोड़
देता
हूँ
वो
रस्ता
आम
हो
जाने
के
बाद
Jamal Ehsani
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उनके
बच्चे
यूँँ
ही
मुरझाएँगे
बैठे
बैठे
ये
जो
मज़दूर
हैं
क्या
खाएँगे
बैठे
बैठे
Salman Zafar
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मज़दूर
भले
सारी
ही
उम्र
करे
मेहनत
बेटी
की
विदाई
लायक़
पैसे
नहीं
होते
Amaan Pathan
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मुझ
को
ख़्वाहिश
है
उसी
शान
की
दिवाली
की
लक्ष्मी
देश
में
उल्फ़त
की
शब-ओ-रोज़
रहे
देश
को
प्यार
से
मेहनत
से
सँवारें
मिल
कर
अहल-ए-भारत
के
दिलों
में
ये
'कँवल'
सोज़
रहे
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Kanval Dibaivi
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उम्र
भर
की
बात
बिगड़ी
इक
ज़रा
सी
बात
में
एक
लम्हा
ज़िंदगी
भर
की
कमाई
खा
गया
Nazeer Banarasi
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फ़रिश्ते
से
बढ़
कर
है
इंसान
बनना
मगर
इस
में
लगती
है
मेहनत
ज़ियादा
Altaf Hussain Hali
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कब
करे
ये
दिल
मुहब्बत
नौकरी
दिन
खा
रही
है
Ravi 'VEER'
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उस
वक़्त
भी
अक्सर
तुझे
हम
ढूँढने
निकले
जिस
धूप
में
मज़दूर
भी
छत
पर
नहीं
जाते
Munawwar Rana
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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सोचता
हूँ
कि
उसकी
आख़िरी
कॉल
आख़िरी
ही
हुई
तो
क्या
होगा
Fahmi Badayuni
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तेरे
जैसा
कोई
मिला
ही
नहीं
कैसे
मिलता
कहीं
पे
था
ही
नहीं
घर
के
मलबे
से
घर
बना
ही
नहीं
ज़लज़ले
का
असर
गया
ही
नहीं
मुझ
पे
हो
कर
गुज़र
गई
दुनिया
मैं
तिरी
राह
से
हटा
ही
नहीं
कल
से
मसरूफ़-ए-ख़ैरियत
मैं
हूँ
शे'र
ताज़ा
कोई
हुआ
ही
नहीं
रात
भी
हम
ने
ही
सदारत
की
बज़्म
में
और
कोई
था
ही
नहीं
यार
तुम
को
कहाँ
कहाँ
ढूँडा
जाओ
तुम
से
मैं
बोलता
ही
नहीं
याद
है
जो
उसी
को
याद
करो
हिज्र
की
दूसरी
दवा
ही
नहीं
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Fahmi Badayuni
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पूछ
लेते
वो
बस
मिज़ाज
मिरा
कितना
आसान
था
इलाज
मिरा
चारा-गर
की
नज़र
बताती
है
हाल
अच्छा
नहीं
है
आज
मिरा
मैं
तो
रहता
हूँ
दश्त
में
मसरूफ़
क़ैस
करता
है
काम-काज
मिरा
कोई
कासा
मदद
को
भेज
अल्लाह
मेरे
बस
में
नहीं
है
ताज
मिरा
मैं
मोहब्बत
की
बादशाहत
हूँ
मुझ
पे
चलता
नहीं
है
राज
मिरा
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Fahmi Badayuni
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बस
तुम्हारा
मकाँ
दिखाई
दिया
जिस
में
सारा
जहाँ
दिखाई
दिया
वो
वहीं
था
जहाँ
दिखाई
दिया
इश्क़
में
ये
कहाँ
दिखाई
दिया
उम्र
भर
पर
नहीं
मिले
हम
को
उम्र
भर
आसमाँ
दिखाई
दिया
रोज़
दीदा-वरों
से
कहता
हूँ
तू
कहाँ
था
कहाँ
दिखाई
दिया
अच्छे-ख़ासे
क़फ़स
में
रहते
थे
जाने
क्यूँँ
आसमाँ
दिखाई
दिया
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Fahmi Badayuni
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