ik faqat KHud se gilaa baaki raha | इक फ़क़त ख़ुद से गिला बाक़ी रहा

  - Amardeep Singh
इकफ़क़तख़ुदसेगिलाबाक़ीरहा
वर्नाइसदिलमेंतोक्याबाक़ीरहा
इकतरफ़तेरीकमीखलतीरही
इकतरफ़अपनाख़लाबाक़ीरहा
राहकीआसानियाँजातीरहीं
मंज़िलोंकामरहलाबाक़ीरहा
ज़िंदगी-दर-ज़िंदगीचलतीरही
मसअला-दर-मसअलाबाक़ीरहा
हमहद-ए-इदराकसेमजबूरथे
हमसेजोथामावराबाक़ीरहा
होरहेंगेहमभीउसकेएकदिन
हाँअगरदिलमेंख़ुदाबाक़ीरहा
शहर-ए-दिलकेबा-वफ़ाजबखोगए
आख़िरशइकबे-वफ़ाबाक़ीरहा
दिलसेतेरीयादभीरुख़्सतहुई
औरअबक्यामो'जिज़ाबाक़ीरहा
दिल-ए-नाकामकुछतोकरगुज़र
याअभीकुछसोचनाबाक़ीरहा
  - Amardeep Singh
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