shahar ki veeraan sadak par jashn-e-gham karte hue | शहर की वीराँ सड़क पर जश्न-ए-ग़म करते हुए

  - Amardeep Singh
शहरकीवीराँसड़कपरजश्न-ए-ग़मकरतेहुए
जारहाहूँख़ुश्की-ए-मिज़्गाँकोनमकरतेहुए
ज़िंदगीतन्हासफ़रपरगामज़नहोतीहुई
औरहमयादोंकोपिछलीहम-क़दमकरतेहुए
बोलउठतेहैंकईबरसोंपुरानेज़ख़्मभी
दिलहोजबमसरूफ़अपनीचुपरक़मकरतेहुए
उसकाभीकहनायहीबर्बादहोजाओगेतुम
औरहमभीठीकवैसादम-ब-दमकरतेहुए
मेहरबानीलाज़मीहैख़ुदभीअपनीज़ातपर
हर्जकैसाआपअपनेपरकरमकरतेहुए
दंगरहजाओगेतुमअपनेकरम-फ़रमाकोजब
देखलोगेइकदफ़ाघरमेंसितमकरतेहुए
ऐन-मुमकिनहैतड़पउठनाहमाराएकदिन
यादमेंअल्लाहकीयाद-ए-सनमकरतेहुए
जानेकिसदमलेउड़ेयेमौतकाझोंका'अमर'
एकदिनख़ाक-ए-बदनकोख़ुदमेंज़मकरतेहुए
  - Amardeep Singh
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