nafs nafs iztiraab sa kuchh | नफ़स नफ़स इज़्तिराब सा कुछ

  - Amardeep Singh
नफ़सनफ़सइज़्तिराबसाकुछ
हैज़िंदगीयाअज़ाबसाकुछ
फ़रेबखातीहैप्यासअपनी
क़दमक़दमहैसराबसाकुछ
नईनईगुफ़्तुगूकानश्शा
बड़ीपुरानीशराबसाकुछ
किसीवसीलेतोरातगुज़रे
नींदहैऔरख़्वाबसाकुछ
हैंचश्म-ए-गिर्यांकोग़महज़ारों
चलोकरेंइंतिख़ाबसाकुछ
इनअच्छेलोगोंमेंवाक़ईक्या
कहींनहींहैख़राबसाकुछ
वरक़वरक़पढ़लियागयावो
थाजिसकाचेहराकिताबसाकुछ
येराहपुर-ख़ारकुछनहींजब
चुभाहोदिलमेंगुलाबसाकुछ
जानेक्यूँख़ुदअज़िय्यतीसे
मुझेनहींइज्तिनाबसाकुछ
'अमर'वहीशख़्सदिलकाजोहै
ज़रासाअच्छाख़राबसाकुछ
  - Amardeep Singh
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