zakham kha kar bhi muskurana hai | ज़ख़्म खा कर भी मुस्कुराना है

  - Altaf Ahmad Aazmi
ज़ख़्मखाकरभीमुस्कुरानाहै
दोस्तदुश्मनकोआज़मानाहै
वोकहाँऔरइल्तिफ़ातकहाँ
दिलदुखानेकाइकबहानाहै
जानताहूँहक़ीक़त-ए-हस्ती
जानकरभीफ़रेबखानाहै
ढूँढतीफिररहीहैबर्क़-ए-सितम
चंदतिनकोंकाआशियानाहै
फ़िक्र-ए-दुनियामेंघुलरहेहैंलोग
चारदिनकायेआब-ओ-दानाहै
कुछनहींसैर-ए-मै-कदासग़रज़
ज़ीस्तकरनेकाइकबहानाहै
ग़मसे'अहमद'नजातक्यूँकरहो
इससेरिश्ताबहुतपुरानाहै
  - Altaf Ahmad Aazmi
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