sab hai haasil magar khushi to nahin | सब है हासिल मगर ख़ुशी तो नहीं

  - Altaf Ahmad Aazmi
सबहैहासिलमगरख़ुशीतोनहीं
साँसलेनाहीज़िंदगीतोनहीं
लोगपत्थरउठारहेहैंक्यूँ
दिलकीबस्तीअभीबसीतोनहीं
इसमेंहोताहैख़ून-ए-दिलअक्सर
ज़ीस्तकरनाकोईहँसीतोनहीं
पत्थरोंपेखुलेंगेलाला-ओ-गुल
लोगकहतेहैंदिल-लगीतोनहीं
मैंनेसबकोदियाहैआईना
आपसेकोईदुश्मनीतोनहीं
जिससेपत्थरकादिलहोदोनीम
वोनज़ररश्क-ए-आगहीतोनहीं
गर्मी-ए-दिलजिसमेंहो'अहमद'
हैवोकुछऔरशा'इरीतोनहीं
  - Altaf Ahmad Aazmi
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