tujh se ai dost ab gilaa hi nahin | तुझ से ऐ दोस्त अब गिला ही नहीं

  - Altaf Ahmad Aazmi
तुझसेदोस्तअबगिलाहीनहीं
तेरीफ़ितरतमेंतोवफ़ाहीनहीं
राहमेंदिलपड़ाहैयापत्थर
कोईरुककरयेदेखताहीनहीं
हाएअहल-ए-ख़िरदकीकम-नज़री
दिलकाअबकोईतज़्किराहीनहीं
आइनेकीतरहहोदिलजिसका
कोईऐसामुझेमिलाहीनहीं
अपनेसाएसेलोगडरतेहैं
राज़-ए-दिलकोईखोलताहीनहीं
किसकोसौग़ात-ए-आगहीदेंहम
कोईबस्तीमेंहम-नवाहीनहीं
ज़ख़्मक्यामुंदमिलहुएदिलके
ज़िंदगीमेंकोईमज़ाहीनहीं
शम्अकहकरयेबुझगईकलरात
दर्द-ए-दिलकीकोईदवाहीनहीं
अक़्ल-ओ-दिलमेंकीजिएतफ़रीक़
इससेबढ़करकोईख़ताहीनहीं
क्यूँडरातीहैगर्दिश-ए-अय्याम
दिलमेंअबकोईमुद्दआहीनहीं
हैगिलाअपनीकम-सवादीसे
ज़िंदगीसेकोईगिलाहीनहीं
लोगकश्कोललेकेफिरतेहैं
हाथअबतकमिराउठाहीनहीं
रोज़पढ़ताहूँग़ौरसेचेहरे
शहरमेंकोईआश्नाहीनहीं
क्यूँदिखाताहैआइनासबको
कोई'अहमद'सेबोलताहीनहीं
  - Altaf Ahmad Aazmi
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