tumhaare saa.e se ukta gaya hooñ | तुम्हारे साए से उक्ता गया हूँ

  - Alok Mishra
तुम्हारेसाएसेउक्तागयाहूँ
मैंअपनीधूपवापसचाहताहूँ
कहोकुछतोज़बाँसेबातक्याहै
मैंक्याफिरसेअकेलाहोगयाहूँ
मगरयेसबमुझेकहनानहींथा
जानेक्यूँमैंयेसबकहरहाहूँ
सबबकुछभीनहींअफ़्सुर्दगीका
मैंबसख़ुशरहतेरहतेथकगयाहूँ
गिलाकरतानहींअबमौसमोंसे
मैंइनपेड़ोंकेजैसाहोगयाहूँ
  - Alok Mishra
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