chalte hain ki ab sabr bhi itnaa nahin rakhte | चलते हैं कि अब सब्र भी इतना नहीं रखते

  - Alok Mishra
चलतेहैंकिअबसब्रभीइतनानहींरखते
इकऔरनएदुखकाइरादानहींरखते
बसरेतसीउड़तीहैअबउसराहगुज़रपर
जोपेड़भीमिलतेहैंवोसायानहींकरते
किसतौरसेआख़िरउन्हेंतस्वीरकरेंहम
जोख़्वाबअज़लसेकोईचेहरानहींरखते
इकबारबिछड़जाएँतोढूँढेमिलेंगे
हमरहमेंकहींनक़्श-ए-कफ़-ए-पानहींरखते
फिरसुल्हभीतुमबिनतोकहाँहोनीथीख़ुदसे
सोरब्तभीअबख़ुदसेज़ियादानहींरखते
उसमोड़पेरूठेहोतुमदोस्तकिजिसपर
दुश्मनभीकोईरंजपुरानानहींरखते
क्यासोचकेज़िंदाहैंतिरेदश्तमेंयेलोग
आँखोंमेंजोइकख़्वाबकाटुकड़ानहींरखते
  - Alok Mishra
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