ham musalsal ik bayaañ dete hue | हम मुसलसल इक बयाँ देते हुए

  - Alok Mishra
हममुसलसलइकबयाँदेतेहुए
थकचुकेहैंइम्तिहाँदेतेहुए
बे-ज़बाँअल्फ़ाज़काग़ज़परयहाँ
गूँगीयादोंकोज़बाँदेतेहुए
होगएग़र्क़ाबउसकीआँखमें
ख़्वाहिशोंकोहममकाँदेतेहुए
फिरउभरआयातिरीयादोंकाचाँद
उजलाउजलासाधुआँदेतेहुए
लुत्फ़जलनेकाअलगहैहिज्रमें
ज़ख़्ममेरेइम्तिहाँदेतेहुए
लारहेहैंनींदकेआग़ोशमें
अश्कमुझकोथपकियाँदेतेहुए
रोपड़ाथाजानेक्यूँँवोडाकिया
आजमुझकोचिट्ठियाँदेतेहुए
इकबलाकाशोरथाआँखोंमेंपर
कहपायाकुछवोजाँदेतेहुए
फ़ासलाइतनारखनाथाख़ुदा
इसज़मींकोआसमाँदेतेहुए
  - Alok Mishra
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