bujhe labon pe tabassum ke gul sajaata hua | बुझे लबों पे तबस्सुम के गुल सजाता हुआ

  - Alok Mishra
बुझेलबोंपेतबस्सुमकेगुलसजाताहुआ
महकउठाहूँमैंतुझकोग़ज़लमेंलाताहुआ
उजाड़दश्तसेयेकौनआजगुज़राहै
गईरुतोंकीवहीख़ुशबुएँलुटाताहुआ
तुम्हारेहाथोंसेछुटकरजानेकबसेमैं
भटकरहाहूँख़लाओंमेंटिमटिमाताहुआ
निगलजाएकहींबे-रुख़ीमुझेतेरी
किरोपड़ाहूँमैंअबकेतुझेहँसाताहुआ
तूशाहज़ादीमहकतेहुएउजालोंकी
मैंएकख़्वाबअँधेरोंकीचोटखाताहुआ
मिराबदनयेकिसीबर्फ़केबदनसाहै
पिघलजाऊँमैंतुझकोगलेलगाताहुआ
तुम्हारीआँखोंकापानीकहींबनजाऊँ
मैंडररहाहूँबहुतदास्ताँसुनाताहुआ
  - Alok Mishra
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