KHaak ho kar bhi kab mitoonga main | ख़ाक हो कर भी कब मिटूंगा मैं

  - Alok Mishra
ख़ाकहोकरभीकबमिटूंगामैं
फूलबनकरयहींखिलूँगामैं
तुझकोआवाज़भीमैंक्यूँँदूँगा
तेरारस्ताभीक्यूँँतकूँगामैं
इकपुरानेसेज़ख़्मपरअबके
कोईमरहमनयारखूँगामैं
घेरलेंगीयेतितलियाँमुझको
ख़ुशबुएँजि
यूँँरिहाकरूँँगामैं
ख़ुदसेबाहरतोकमनिकलताहूँ
जीमेंआयातोफिरमिलूँगामैं
वर्नाजीनामुहालकरदेगा
दर्दकोअबग़ज़लकरूँँगामैं
धुकधुकीसीलगीहैक्यूँँजीको
इतनीजल्दीकहाँमरूँगामैं
साँसेंदेतीरहींजोचिंगारी
एकजंगलसाजलउठूँगामैं
थकगयाहूँमैंइसजज़ीरेपर
फिरसमुंदरकारुख़करूँँगामैं
रूहकायेलिबासबदलूँगा
भेसदूजाकोईधरूँगामैं
  - Alok Mishra
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