jazb kuchh titliyon ke par men hai | जज़्ब कुछ तितलियों के पर में है

  - Alok Mishra
जज़्बकुछतितलियोंकेपरमेंहै
कैसीख़ुशबूसीउसकलरमेंहै
आनेवालाहैकोईसहराक्या
गर्दहीगर्दरहगुज़रमेंहै
जबसेदेखाहैख़्वाबमेंउसको
दिलमुसलसलकिसीसफ़रमेंहै
छूकेगाड़ीबग़लसेक्यागुज़री
बे-ख़यालीसीइकनज़रमेंहै
मैंभीबिखराहुआहूँअपनोंमें
वोभीतन्हासाअपनेघरमेंहै
राततुमयादभीनहींआए
फिरउदासीसीक्यूँँसहरमेंहै
उसकीख़ामोशीगूँजतीहोगी
शोरबरपाजोदिल-खंडरमेंहै
हाथसरपरवोशाख़ेंरखतीहैं
कोईअपनासाउसशजरमेंहै
  - Alok Mishra
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