cheekh ki or main khincha jaaun | चीख़ की ओर मैं खिंचा जाऊँ

  - Alok Mishra
चीख़कीओरमैंखिंचाजाऊँ
घुपअँधेरोंमेंडूबताजाऊँ
कबसेफिरताहूँइसतवक़्क़ोपर
ख़ुदकोशायदकहींमैंपाजाऊँ
रूहतकबुझचुकीहैमुद्दतसे
तूजोछूलेतोजगमगाजाऊँ
लम्हालम्हायेछाँवघटतीहै
पत्तापत्तामैंटूटताजाऊँ
धूपपीकरतमामसहराकी
अब्रबनकरमैंख़ुदपेछाजाऊँ
दुखसेकैसाभराहुआहैदिल
उसकोसोचूँतोसोचताजाऊँ
एकपत्ताहूँशाख़सेबिछड़ा
जानेबहकरमैंकिसदिशाजाऊँ
जीमेंआताहैछोड़दूँयेज़मीं
आसमानोंमेंजासमाजाऊँ
  - Alok Mishra
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