bujhti aankhoñ men tire KHvaab ka bosa rakha | बुझती आँखों में तिरे ख़्वाब का बोसा रक्खा

  - Alok Mishra
बुझतीआँखोंमेंतिरेख़्वाबकाबोसारक्खा
रातफिरहमनेअँधेरोंमेंउजालारक्खा
ज़ख़्मसीनेमेंतोआँखोंमेंसमुंदरठहरा
दर्दकोमैंनेमुझेदर्दनेज़िंदारक्खा
साथरहताथामगरसाथनहींथामेरे
उसकीक़ुर्बतनेभीअक्सरमुझेतन्हारक्खा
वक़्तकेसाथतुझेभूलहीजातालेकिन
इकहरेख़तनेमिरेज़ख़्मकोताज़ारक्खा
मेराईमाँटिकापाईंहज़ारोंशक्लें
मेरीआँखोंनेतिरेप्यारमेंरोज़ारक्खा
क्याक़यामतहैकितेरीहीतरहसेमुझसे
ज़िंदगीनेभीबहुतदूरकारिश्तारक्खा
  - Alok Mishra
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