aankhoñ ka poora shahar hi sailaab kar gaya | आँखों का पूरा शहर ही सैलाब कर गया

  - Alok Mishra
आँखोंकापूराशहरहीसैलाबकरगया
येकौनमुझमेंनज़्मकीसूरतउतरगया
जंगलमेंतेरीयादकेजुगनूँचमकउठे
मैदाँसियाह-शबकाउजालोंसेभरगया
वर्नासियाहरातमेंझुलसाहुआथामैं
येतोतुम्हारीधूपमेंकुछकुछनिखरगया
झूमाथिरकतेनाचतेजोड़ोंमेंकुछघड़ी
दिलफिरजानेकैसीउदासीसेभरगया
दोनोंअनामेंचूरथेअन-बनसीहोगई
रिश्तानयानयासाथाकुछदिनमेंमरगया
पहलेकुछएकदिनतोकटीमुश्किलोंमेंरात
फिरतेराहिज्रमेरीरगोंमेंउतरगया
हाथोंसेअपनेख़ुदहीनशेमनउजाड़कर
देखोउदासहोकेपरिंदाकिधरगया
इकचीख़आसमानकेदामनमेंसोगई
दिलकीज़मींपेदर्दहरइकसूबिखरगया
  - Alok Mishra
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