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Ali Mohammed Shaikh
bolta hooñ to duniya ranjishe jataati hain
bolta hooñ to duniya ranjishe jataati hain | बोलता हूँ तो दुनिया रंजिशे जताती हैं
- Ali Mohammed Shaikh
बोलता
हूँ
तो
दुनिया
रंजिशे
जताती
हैं
चुप
रहूँ
तो
लोगों
को
वहशतें
सताती
हैं
- Ali Mohammed Shaikh
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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छोटी
सी
बात
पे
ख़ुश
होना
मुझे
आता
था
पर
बड़ी
बात
पे
चुप
रहना
तुम्ही
से
सीखा
Zehra Nigaah
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ग़लत
बातों
को
ख़ामोशी
से
सुनना
हामी
भर
लेना
बहुत
हैं
फ़ाएदे
इस
में
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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आप
जिस
चीज़
को
कहते
हैं
कि
बेहोशी
है
वो
दिमाग़ों
में
ज़रा
देर
की
ख़ामोशी
है
सूखते
पेड़
से
पंछी
का
जुदा
हो
जाना
ख़ुद-परस्ती
नहीं
एहसान-फ़रामोशी
है
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Ashu Mishra
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भले
ही
जान-लेवा
हो
सियासत
को
ग़लत
कहना
मगर
फिर
भी
ये
सच
ईमान
वाले
लोग
कहते
हैं
Amaan Pathan
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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आधी
रात
की
चुप
में
किस
की
चाप
उभरती
है
छत
पे
कौन
आता
है
सीढ़ियाँ
नहीं
खुलतीं
Parveen Shakir
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एक
दिन
मेरी
ख़ामुशी
ने
मुझे
लफ़्ज़
की
ओट
से
इशारा
किया
Anjum Saleemi
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मैं
उस
को
देख
के
चुप
था
उसी
की
शादी
में
मज़ा
तो
सारा
इसी
रस्म
के
निबाह
में
था
Muneer Niyazi
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अरे
मैं
इंतिक़ामन
रो
रहा
हूँ
मैं
चुप
हो
जाऊँगा
उसको
रुला
के
Swapnil Tiwari
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दुनिया
से
लड़ते
लड़ते
सबर
खोने
लगा
है
हालात
का
अना
पे
असर
होने
लगा
है
Ali Mohammed Shaikh
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बात
करके
देखिए
तो
बात
क्यूँ
करते
नहीं
लब
भले
जल
जाएँ
हम
लफ्ज़
से
फिरते
नहीं
दोस्ती
में
दुश्मनी
हो
दुश्मनी
में
दोस्ती
जब
निभाना
हो
मुरव्वत
हम
कहीं
करते
नहीं
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Ali Mohammed Shaikh
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मैं
अकेला
हूँ
मगर
खूब
तजुर्बा
है
मुझे
कारवां
दूर
तलक
कैसे
खींचना
है
मुझे
मैं
हमेशा
से
ही
देता
रहा
तवजजा
तुझे
ग़ौर
से
तू
ही
कहाँ
यार
देखता
है
मुझे
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Ali Mohammed Shaikh
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होता
है
दर्द
क़ल्ब
के
नज़दीक
सुना
था
तुम
से
मिले
तो
पुख़्ता
हुआ
ठीक
सुना
था
Ali Mohammed Shaikh
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जब
से
तेरी
निगाह
में
सजने
लगे
है
हम
ख़ुद
को
बड़ा
हसीन
समझने
लगे
है
हम
Ali Mohammed Shaikh
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