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Ali Mohammed Shaikh
main akela hooñ magar khoob tajurba hai mujhe
main akela hooñ magar khoob tajurba hai mujhe | मैं अकेला हूँ मगर खूब तजुर्बा है मुझे
- Ali Mohammed Shaikh
मैं
अकेला
हूँ
मगर
खूब
तजुर्बा
है
मुझे
कारवां
दूर
तलक
कैसे
खींचना
है
मुझे
मैं
हमेशा
से
ही
देता
रहा
तवजजा
तुझे
ग़ौर
से
तू
ही
कहाँ
यार
देखता
है
मुझे
- Ali Mohammed Shaikh
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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उस
ख़ूब-रू
से
रब्त
ज़रा
कम
हुआ
मेरा
ये
देख
कर
उदासी
मेरे
संग
लग
गई
Siddharth Saaz
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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सीधा-साधा
डाकिया
जादू
करे
महान
एक
ही
थैले
में
भरे
आँसू
और
मुस्कान
Nida Fazli
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मुझ
ऐसा
शख़्स
अगर
क़हक़हों
से
भर
जाए
ये
साँस
लेती
उदासी
तो
घुट
के
मर
जाए
वो
मेरे
बाद
तरस
जाएगा
मोहब्बत
को
उसे
ये
कहना
अगर
हो
सके
तो
मर
जाए
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Rakib Mukhtar
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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मुझे
रोना
नहीं
आवाज़
भी
भारी
नहीं
करनी
मोहब्बत
की
कहानी
में
अदाकारी
नहीं
करनी
Afzal Khan
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बुरा
कहा
न
बुराई
का
ऐतिराफ़
किया
इसी
अदा
ने
सभी
को
मिरे
ख़िलाफ़
किया
बशर
ने
यूँँ
भी
अक़ीदे
से
इख़्तिलाफ़
किया
ज़रूरी
दिल
था
मगर
चेहरे
को
ही
साफ़
किया
सुना
दी
हम
ने
अदालत
को
इस
तरह
से
सज़ा
मिली
रिहाई
गुनाहों
का
ऐतिराफ़
किया
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Ali Mohammed Shaikh
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ऐसे
शगुफ्ता
रंग
गुज़िश्ता
कभी
न
था
मैं
फूल
था
मगर
तेरे
दर
का
कभी
न
था
इतना
तेरे
दयार
से
मुझको
अता
हुआ
इतना
नसीब
ने
मेरे
सोचा
कभी
न
था
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Ali Mohammed Shaikh
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दिन
ब
दिन
पहले
से
भी
और
खिल
के
आई
हो
सच
बताना
आज
फिर
किस
से
मिलके
आई
हो
दर्जी
वाले
चौक
पर
तो
कल
से
है
बंदिश
लगी
अब
न
कहना
तुम
वहा
से
कपड़े
सिल
के
आई
हो
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Ali Mohammed Shaikh
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मेरी
नज़रे
उठी
उठी,
तेरी
नज़रें
झूकी
झुकी
तोल
रहे
हैं
प्यार
को
जैसे
दो
पैमानों
में
Ali Mohammed Shaikh
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मोहब्बत
तो
कब
की
फ़ना
हो
चुकी
है
जो
ज़िंदा
है
हर
सू
वो
मैं
और
तू
है
Ali Mohammed Shaikh
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