shehr-e-dil kunj-e-bayaaban nahin tha pahle | शहर-ए-दिल कुंज-ए-बयाबान नहीं था पहले

  - Ali Muzammil
शहर-ए-दिलकुंज-ए-बयाबाननहींथापहले
मैंकभीइतनापरेशाननहींथापहले
बाएँपहलूमेंजोइकसंगपड़ाहैसाकित
येधड़कताभीथाबे-जाननहींथापहले
शहरयारोंसेमरासिमथेबहुतहीगहरे
तीरा-बख़्तोंसेभीअंजाननहींथापहले
लफ़्ज़रूठेहुएरहतेथेक़लमसेअक्सर
जिनसेतज्दीदकाइम्काननहींथापहले
जबसफ़रकाटलियाहैतोमिलाहैसबकुछ
साथमेरेकोईसामाननहींथापहले
अबभीबे-नामबसरहोतेहैंऔक़ातमिरे
दिलमेंतौक़ीरकाअरमाननहींथापहले
आजचादरकेबराबरहैमिरेक़दकीबिसात
मैंकिसीशहरकासुलताननहींथापहले
खाएबैठाहैज़मानेसेतअ'ल्लुक़काफ़रेब
तू'अली'इतनातोनादाननहींथापहले
  - Ali Muzammil
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