kisi pe baar-e-digar bhi nigaah kar na sake | किसी पे बार-ए-दिगर भी निगाह कर न सके

  - Ali Akbar Abbas
किसीपेबार-ए-दिगरभीनिगाहकरसके
कोईभीशौक़ब-हद्द-ए-गुनाहकरसके
उजड-पनेमेंतलबकरगएजवाज़-ए-ख़ता
ख़िज़रकेसाथभीहमतोनिबाहकरसके
दयार-ए-हिज्रबसायाहैजोकिबरसोंमें
दम-ए-विसालकीख़ातिरतबाहकरसके
अमाँतलबहुएदश्त-ए-बे-पनाहमेंहम
सवाद-ए-जाँभीमगरहर्फ़-ए-राहकरसके
सफ़र-मआबयहीबहर-ओ-बरहैफिरभीहम
परोंकोअपनेकुशाख़्वाह-मख़ाहकरसके
  - Ali Akbar Abbas
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