hamaari aankh ne dekhe hain aise manzar bhi | हमारी आँख ने देखे हैं ऐसे मंज़र भी

  - Ali Ahmad Jalili
हमारीआँखनेदेखेहैंऐसेमंज़रभी
गुलोंकीशाख़सेलटकेहुएथेख़ंजरभी
यहाँवहाँकेअँधेरोंकाक्याकरेंमातम
किइससेबढ़केअँधेरेहैंदिलकेअंदरभी
अभीसेहाथमहकनेलगेहैंक्यूँँमेरे
अभीतोदेखानहींहैबदनकोछूकरभी
किसेतलाशकरेंअबनगरनगरलोगों
जवाबदेतेनहींहैंभरेहुएघरभी
हमारीतिश्ना-लबीपरकोईबूँदगिरी
घटाएँजाचुकींचारोंतरफ़बरसकरभी
येख़ूनरंग-ए-चमनमेंबदलभीसकताहै
ज़राठहरकिबदलजाएँगेयेमंज़रभी
'अली'अभीतोबहुतसीहैंअन-कहीबातें
किना-तमामग़ज़लहैतमामहोकरभी
  - Ali Ahmad Jalili
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