roke se kahii haadsa-e-waqt ruka hai | रोके से कहीं हादसा-ए-वक़्त रुका है

  - Ali Ahmad Jalili
रोकेसेकहींहादसा-ए-वक़्तरुकाहै
शोलोंसेबचाशहरतोशबनमसेजलाहै
कमराकिसीमानूससीख़ुशबूसेबसाहै
जैसेकोईउठकरअभीबिस्तरसेगयाहै
येबातअलगहैकिमैंजीताहूँअभीतक
होनेकोतोसौबारमिराक़त्लहुआहै
फूलोंनेचुरालीहैंमुझेदेखकेआँखें
काँटोंनेबड़ीदूरसेपहचानलियाहै
उससम्तअभीख़ूनकेप्यासेहैंहज़ारों
इससम्तबसइकक़तरा-ए-ख़ूँऔरबचाहै
रूदाद-ए-चराग़ाँतोबहुतख़ूबहैलेकिन
क्याजानिएकिसकिसकालहूइनमेंजलाहै
इसरंग-ए-तग़ज़्ज़ुलपे'अली'छापहैमेरी
येज़ौक़-ए-सुख़नमुझकोविरासतमेंमिलाहै
  - Ali Ahmad Jalili
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