laai hai kis maqaam pe ye zindagi mujhe | लाई है किस मक़ाम पे ये ज़िंदगी मुझे

  - Ali Ahmad Jalili
लाईहैकिसमक़ामपेयेज़िंदगीमुझे
महसूसहोरहीहैख़ुदअपनीकमीमुझे
देखोतुमआजमुझकोबुझातेतोहोमगर
कलढूँढतीफिरेगीबहुतरौशनीमुझे
तयकररहाहूँमैंभीयेराहेंसलीबकी
आवाज़हयातदेनाअभीमुझे
सूखेशजरकोफेंकदूँकैसेनिकालकर
देतारहाहैसायाशजरजोकभीमुझे
क्यूँँकररहीहैमुझसेसवालातज़िंदगी
कहदोजवाबकीनहींफ़ुर्सतअभीमुझे
क्याचाहताथावक़्तपेलिखनापूछिए
हुर्मतक़लमकीअपनीबचानीपड़ीमुझे
दिल-दारियाँभीरहगईंपर्देमें'अली'
लहजाबदलबदलकेसदादीगईमुझे
  - Ali Ahmad Jalili
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