gham se mansoob karoon dard ka rishta de doon | ग़म से मंसूब करूँँ दर्द का रिश्ता दे दूँ

  - Ali Ahmad Jalili
ग़मसेमंसूबकरूँँदर्दकारिश्तादेदूँ
ज़िंदगीतुझेजीनेकासलीक़ादेदूँ
बे-चरागीयेतिरीशाम-ए-ग़रीबाँकबतक
चलतुझेजलतेमकानोंकाउजालादेदूँ
ज़िंदगीअबतोयहीशक्लहैसमझौतेकी
दूरहटजाऊँतिरीराहसेरस्तादेदूँ
तिश्नगीतुझकोबुझानामुझेमंज़ूरनहीं
वर्नाक़तरेकीहैक्याबातमैंदरियादेदूँ
लीहैअंगड़ाईतोफिरहाथउठाकररखिए
ठहरिएमैंउसेलफ़्ज़ोंकालबादादेदूँ
मिरेफ़नतुझेतकमीलकोपहुँचानाहै
तुझेख़ूनकामैंआख़िरीक़तरादेदूँ
सूरजजाएकिसीदिनजोमेरेहाथ'अली'
घोंटदूँरातकादमसबकोउजालादेदूँ
  - Ali Ahmad Jalili
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