karna pada tha jis ke li.e ye safar mujhe | करना पड़ा था जिस के लिए ये सफ़र मुझे

  - Aleem Afsar
करनापड़ाथाजिसकेलिएयेसफ़रमुझे
वोमौज-ए-शौक़छोड़गईरेतपरमुझे
आदाब-ए-बज़्मकेसिवाकुछऔरतोथा
महफ़िलमेंउसनेपानदिएख़ासकरमुझे
लौटाहूँफिरवोजिस्मकीवीरानियाँलिए
हसरतसेदेखतेहैंयेदीवार-ओ-दरमुझे
बाज़ारकातोहोशहैलेकिननहींयेयाद
कलरातकौनछोड़गयामेरेघरमुझे
आँखोंकानूरसीनेमेंमहफ़ूज़करलिया
इसशहरमेंजोहोनापड़ाबे-बसरमुझे
इसकेसिवायेराज़भलाकौनजानता
वोसबकोगालियोंसेनवाज़ेमगरमुझे
  - Aleem Afsar
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