na pooch rabt hai kya us ki dastaan se mujhe | न पूछ रब्त है क्या उस की दास्ताँ से मुझे

  - Aleem Afsar
पूछरब्तहैक्याउसकीदास्ताँसेमुझे
बिछड़गयाकिबिछड़नाथाकारवाँसेमुझे
मिरेबदनमेंकोईभरदेबर्फ़केटुकड़े
किआँचआतीहैरातोंकोकहकशाँसेमुझे
किराया-दारबदलनातोउसकाशेवाथा
निकालकरवोबहुतख़ुशहुआमकाँसेमुझे
सदाएँजिस्मकीदीवारपारकरतीहैं
कोईपुकाररहाहैमगरकहाँसेमुझे
खड़ाखड़ायूँँहीसरपरकहींआनगिरे
लगाहीरहताहैयेदरभीआसमाँसेमुझे
अबउसकीबारीहैतोउससेकैसेमुँहमोड़ूँ
कभीतोउसनेभीचाहाथाजिस्म-ओ-जाँसेमुझे
मिरेइरादोंकोवोमुझसेपूछकर'अफ़सर'
दो-चारकरगयाइकऔरइम्तिहाँसेमुझे
  - Aleem Afsar
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