koi bhi shay kahaan naayaab hai hamaare li.e | कोई भी शय कहाँ नायाब है हमारे लिए

  - Alam Khursheed
कोईभीशयकहाँनायाबहैहमारेलिए
खुलाहुआतोदर-ए-ख़्वाबहैहमारेलिए
हमेंहीरौशनीउसकीनज़रनहींआती
चराग़तोपस-ए-मेहराबहैहमारेलिए
पलकझपकतेहीसबकुछनयासालगताहै
येज़िंदगीभीकोईख़्वाबहैहमारेलिए
उतरतेजातेहैंपहनाइयोंमेंदरियाकी
किजलतीशम्अ'तह-ए-आबहैहमारेलिए
हमींनेबंदकिएहैंतमामदरवाज़े
येशहरआजभीबेताबहैहमारेलिए
बसएकमौजनेयेहालकरदियाअपना
हरएकमौजहीगिर्दाबहैहमारेलिए
हरएकशख़्सकेदा'वेअलगअलग'आलम'
अगरचेबामपेमहताबहैहमारेलिए
  - Alam Khursheed
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