koi mausam na kabhi kar sakaa shaadaab ha | कोई मौसम न कभी कर सका शादाब हमें

  - Alam Khursheed
कोईमौसमकभीकरसकाशादाबहमें
शहरमेंजीनेकेआएनहींआदाबहमें
बहतेदरियामेंकोईअक्सठहरताहीनहीं
यादआताहैबहुतगाँवकातालाबहमें
इसतरहप्यासबुझाईहैकहाँदरियाने
एकक़तरेनेकियाजिसतरहसैराबहमें
झिलमिलीरौशनीहर-सम्तनज़रआतीहै
खींचतीहैकोईक़िंदीलतह-ए-आबहमें
क्यापताकौनसेजन्मोंकाहैरिश्ताअपना
ढूँडहीलेतेहैंहरबहरमेंगिर्दाबहमें
दिनउलटदेताहैहरख़्वाबकीता'बीरमगर
रातदिखलातीहैफिरकोईनयाख़्वाबहमें
बे-अमाँहमजोहुएहैंतोहमेंयादआया
रोज़देतेथेसदामिम्बर-ओ-मेहराबहमें
काशमा'लूमयेपहलेहमेंहोता'आलम'
देखनाचाहताथावोभीज़फ़र-याबहमें
  - Alam Khursheed
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