kabhi main zikr karoon din ki shaadmaani ka | कभी मैं ज़िक्र करूँँ दिन की शादमानी का

  - Alam Khursheed
कभीमैंज़िक्रकरूँँदिनकीशादमानीका
फ़सानाख़त्मतोहोशबकीसरगिरानीका
सिमटकेगयाक़दमोंमेंकिसतरहसहरा
सुनाथाशोरबहुतउसकीबे-करानीका
अजबनहींकिनएरास्तेनिकलआएँ
किसीनेरास्तारोकाहैबहतेपानीका
तमामअहल-ए-ज़बाँबातिलोंकेहक़मेंहैं
मुझेमलालनहींअपनीबे-ज़बानीका
जोबातकहनीथीअबतककहीनहींमैंने
मैंइख़्तितामकरूँँकैसेइसकहानीका
ख़ुदासमझताहैख़ुदकोयहाँजोआताहै
अजीबहालहै'आलम'सरा-ए-फ़ानीका
  - Alam Khursheed
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