kyun aañkhen band kar ke raaste men chal raha hooñ | क्यूँँ आँखें बंद कर के रस्ते में चल रहा हूँ

  - Alam Khursheed
क्यूँँआँखेंबंदकरकेरस्तेमेंचलरहाहूँ
क्यामैंभीरफ़्तारफ़्तापत्थरमेंढलरहाहूँ
चारोंतरफ़हैंशोलेहम-साएजलरहेहैं
मैंघरमेंबैठाबैठाबसहाथमलरहाहूँ
मेरेधुएँसेमेरीहरसाँसघुटरहीहै
मैंराहकादियाहूँऔरघरमेंजलरहाहूँ
आँखोंपेछागयाहैकोईतिलिस्मशायद
पलकेंझपकरहाहूँमंज़रबदलरहाहूँ
तब्दीलियोंकानश्शामुझपरचढ़ाहुआहै
कपड़ेबदलरहाहूँचेहराबदलरहाहूँ
इसफ़ैसलेसेख़ुशहैंअफ़रादघरकेसारे
अपनीख़ुशीसेकबमैंघरसेनिकलरहाहूँ
इनपत्थरोंपेचलनाजाएगामुझेभी
ठोकरतोखारहाहूँलेकिनसँभलरहाहूँ
काँटोंपेजबचलूँगारफ़्तारतेज़होगी
फूलोंभरीरविशपरबचबचकेचलरहाहूँ
चश्मेंकीतरह'आलम'अशआ'रफूटतेहैं
कोह-ए-गिराँकीसूरतमेंभीउबलरहाहूँ
  - Alam Khursheed
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