jafaa ki rasm-e-sitam ka rivaaj badlega | जफ़ा की रस्म-ए-सितम का रिवाज बदलेगा

  - Akhtar Ziai
जफ़ाकीरस्म-ए-सितमकारिवाजबदलेगा
फ़क़ीह-ए-शहरकाआख़िरमिज़ाजबदलेगा
मैंजानताहूँबदलतीरुतोंकीख़ुश्बूसे
हवा-ए-दश्ततिराइम्तिज़ाजबदलेगा
जुमूद-ए-मर्गनुमूदअस्लज़िंदगीहैतोफिर
जोकलबदलायक़ीननवोआजबदलेगा
ख़ुलूस-ओ-मेहर-ओ-वफ़ाख़्वाबहोगएजैसे
जानेकबयेनहूसतकाराजबदलेगा
नएशुऊ'रकेचर्चेहैंचारसू'अख़्तर'
मुझेयक़ींहैयेकोहनासमाजबदलेगा
  - Akhtar Ziai
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy