jo bhi mil jaata hai ghar-baar ko de deta hooñ | जो भी मिल जाता है घर-बार को दे देता हूँ

  - Akhtar Nazmi
जोभीमिलजाताहैघर-बारकोदेदेताहूँ
याकिसीऔरतलबगारकोदेदेताहूँ
धूपकोदेताहूँतनअपनाझुलसनेकेलिए
औरसायाकिसीदीवारकोदेदेताहूँ
जोदु'आअपनेलिएमाँगनीहोतीहैमुझे
वोदु'आभीकिसीग़म-ख़्वारकोदेदेताहूँ
मुतमइनअबभीअगरकोईनहींहैसही
हक़तोमैंपहलेहीहक़दारकोदेदेताहूँ
जबभीलिखताहूँमैंअफ़सानायहीहोताहै
अपनासबकुछकिसीकिरदारकोदेदेताहूँ
ख़ुदकोकरदेताहूँकाग़ज़केहवालेअक्सर
अपनाचेहराकभीअख़बारकोदेताहूँ
मेरीदूकानकीचीज़ेंनहींबिकती'नज़मी'
इतनीतफ़्सीलख़रीदारकोदेदेताहूँ
  - Akhtar Nazmi
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