silsila zakham zakham jaarii hai | सिलसिला ज़ख़्म ज़ख़्म जारी है

  - Akhtar Nazmi
सिलसिलाज़ख़्मज़ख़्मजारीहै
येज़मींदूरतकहमारीहै
इसज़मींसेअजबत'अल्लुक़है
ज़र्रेज़र्रेसेरिश्तेदारीहै
मैंबहुतकमकिसीसेमिलताहूँ
जिससेयारीहैउससेयारीहै
नावकाग़ज़कीछोड़दीमैंने
अबसमुंदरकीज़िम्मेदारीहै
बेचडालाहैदिनकाहरलम्हा
रातथोड़ीबहुतहमारीहै
रेतकेघरतोबहगएलेकिन
बारिशोंकाख़ुलूसजारीहै
कोई'नज़्मी'गुज़ारकरदेखे
मैंनेजोज़िंदगीगुज़ारीहै
  - Akhtar Nazmi
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