kab logon ne alfaaz ke patthar nahin fenke | कब लोगों ने अल्फ़ाज़ के पत्थर नहीं फेंके

  - Akhtar Nazmi
कबलोगोंनेअल्फ़ाज़केपत्थरनहींफेंके
वोख़तभीमगरमैंनेजलाकरनहींफेंके
ठहरेहुएपानीनेइशारातोकियाथा
कुछसोचकेख़ुदमैंनेहीपत्थरनहींफेंके
इकतंज़हैकलियोंकातबस्सुमभीमगरक्यूँँ
मैंनेतोकभीफूलमसलकरनहींफेंके
वैसेतोइरादानहींतौबा-शिकनीका
लेकिनअभीटूटेहुएसाग़रनहींफेंके
क्याबातहैउसनेमिरीतस्वीरकेटुकड़े
घरमेंहीछुपारक्खेहैंबाहरनहींफेंके
दरवाज़ोंकेशीशेबदलवाइए'नज़मी'
लोगोंनेअभीहाथसेपत्थरनहींफेंके
  - Akhtar Nazmi
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