tumhaari zulf ke saa.e men raat thehri hai | तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साए में रात ठहरी है

  - Akhtar Gwaliori
तुम्हारीज़ुल्फ़केसाएमेंरातठहरीहै
किरंग-ओ-नूरलिएकाएनातठहरीहै
अबजुनूँकीतमन्नाहैख़िरदकीतलब
येकिसमक़ामपेकरहयातठहरीहै
पूछकैसेगुज़ारीहैज़िंदगीहमने
क़दमक़दमपेअलमनाकरातठहरीहै
जहाँमेंजबभीनज़रकोकहींसुकूँमिला
उम्मीद-दगाह-ए-नज़रतेरीज़ातठहरीहै
बंधेहैंपेटपेपत्थरमगरयेशानतिरी
जहाँभीतूनेकहाकाएनातठहरीहै
तिरेतुफ़ैलमेंयेभीजहाँनेदेखाहै
कईबरसकेलिएएकरातठहरीहै
जानेकौनसीहमसेख़ताहुई'अख़्तर'
हमारेक़त्लकीहरसम्तबातठहरीहै
  - Akhtar Gwaliori
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy