ranj-o-gham deta hai ya daad-e-wafa deta hai | रंज-ओ-ग़म देता है या दाद-ए-वफ़ा देता है

  - Akhtar Gwaliori
रंज-ओ-ग़मदेताहैयादाद-ए-वफ़ादेताहै
देखनायेहैज़मानामुझेक्यादेताहै
लोगयेपूछरहेहैंतिरेदीवानेसे
किसकादीवानाहैतूकिसकोसदादेताहै
उसकीअज़्मतकोतोदोस्तख़ुदाहीजाने
कोसनेवालोंकोजोशख़्सदु'आदेताहै
जानेकिससोचमेंडूबाहैमसीहामेरा
ज़हरदेताहैमुझेऔरदवादेताहै
आजयेदेखनेनिकलाहूँब-सदशौक़-ओ-ख़ुलूस
कौनदुनियामेंवफ़ाओंकासिलादेताहै
तुझकोभूलेहुएइकउम्रहुईहैलेकिन
दिलकाहरज़ख़्मतुझेअबभीदु'आदेताहै
अबमैंइसशहरमेंरहताहूँजहाँ'अख़्तर'
इकबनाताहैमकाँदूसराढादेताहै
  - Akhtar Gwaliori
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