gham-e-duniya pe gham-e-zaat pe ro dete hain | ग़म-ए-दुनिया पे ग़म-ए-ज़ात पे रो देते हैं

  - Akhtar Gwaliori
ग़म-ए-दुनियापेग़म-ए-ज़ातपेरोदेतेहैं
ग़मकेमारेहुएहरबातपेरोदेतेहैं
हमकोरोनाहैतोबसआजकाहीरोनाहै
लोगगुज़रेहुएहालातपेरोदेतेहैं
यादआताहैकिसीबातपेरोएथेकभी
अबयेआलमहैकिहरबातपेरोदेतेहैं
हमतोख़ुदमोड़दियाकरतेहैंहालातकारुख़
हमनहींवोकिजोहालातपेरोदेतेहैं
येअदादेखीहैहमनेतिरेदीवानोंकी
जिसपेहँसतेहैंउसीबातपेरोदेतेहैं
आख़िरीबारकोईहमसेमिलाथाकर
यादआतीहैतोउसरातपेरोदेतेहैं
कलजोरुख़फेरलियाकरतेथेमुझसे'अख़्तर'
आजवोभीमिरेहालातपेरोदेतेहैं
  - Akhtar Gwaliori
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