nadeem baagh men josh-e-numoo ki baat na kar | नदीम बाग़ में जोश-ए-नुमू की बात न कर

  - Akhtar Ansari Akbarabadi
नदीमबाग़मेंजोश-ए-नुमूकीबातकर
बहारतोगईरंग-ओ-बूकीबातकर
अजीबभूल-भुलय्याँहैशाहराह-ए-हयात
भटकनेवालेयहाँजुस्तुजूकीबातकर
तबाहकरमज़ाक़-ए-जुनूँकीख़ुद्दारी
दिल-ए-तबाहकिसीतुंद-ख़ूकीबातकर
ख़ुदअपनेतर्ज़-ए-अमलकोसँवारऔरसँवार
मिरेरफ़ीक़तरीक़-ए-अदूकीबातकर
गुरेज़-ए-हुस्नकोअंदाज़-ए-हुस्नकहतेहैं
नज़रसेदेखमगरख़ूब-रूकीबातकर
येबर्क़-ए-हुस्नजलातीतोहैमगरनासेह
वोऔरशयहैमिरेशो'ला-ख़ूकीबातकर
येमय-कदेकीफ़ज़ाकहरहीहै'अख़्तर'
कितिश्नगीमेंभीजाम-ओ-सुबूकीबातकर
  - Akhtar Ansari Akbarabadi
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