saza hai kis ke li.e aur jazaa hai kis ke li.e | सज़ा है किस के लिए और जज़ा है किस के लिए

  - Akbar Ali Khan Arshi Zadah
सज़ाहैकिसकेलिएऔरजज़ाहैकिसकेलिए
पतानहींदर-ए-ज़िंदाँखुलाहैकिसकेलिए
सुराही-ए-मय-ए-नाब-ओ-सफीना-हा-ए-ग़ज़ल
येहर्फ़-ए-हुस्न-ए-मुक़द्दरलिखाहैकिसकेलिए
फ़क़तशुनीदहैअबतकजोदीदहोतोबताएँ
बहार-ए-सब्ज़ा-ओ-रक़्स-ए-सबाहैकिसकेलिए
नहींजोअपनेलिएबावजूदज़ौक़-ए-नज़र
सहीफ़ा-ए-रुख़-ओ-रंग-ए-हिनाहैकिसकेलिए
मिटासकेअगरतिश्ना-कामियाँमेरी
कहोकिख़ूबी-ए-आब-ओ-हवाहैकिसकेलिए
तुम्हेंनहींहोअगरआजगोश-बर-आवाज़
येमेरीफ़िक्रयेमेरीनवाहैकिसकेलिए
येइकसवालहैशिकवानहींगिलाभीनहीं
मिरेख़ुदातिरालुत्फ़-ओ-अताहैकिसकेलिए
  - Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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