sikha saki na jo aadaab-e-may vo khoo kya thii | सिखा सकी न जो आदाब-ए-मय वो ख़ू क्या थी

  - Akbar Ali Khan Arshi Zadah
सिखासकीजोआदाब-ए-मयवोख़ूक्याथी
जोयेथातोफिरइसदर्जाहाव-हूक्याथी
जोबार-ए-दोशरहासरवोकबथाशोरीदा
बहाजिससेलहूवोरग-ए-गुलूक्याथी
फिरएकज़ख़्म-ए-कुशादाजोदिलकोयादजाए
वोलज़्ज़त-ओ-ख़लिश-ए-सोज़न-ओ-रफ़ूक्याथी
जोइज़्न-ए-आमथावालियान-ए-मय-ख़ाना
येसबनुमाइश-ए-पैमाना-ओ-सुबूक्याथी
अगरनिगाह-ए-जहाँकेशुमारमेंथेहम
तोफिरहमारीयेशोहरतभीचार-सूक्याथी
ख़ून-ए-शबथाशब-ख़ूँयेमानलेंलेकिन
शफ़क़तुलू-ए-सहरकोलहूलहूक्याथी
जबरहीहैंबहारेंलिएपयाम-ए-जुनूँ
येपैरहनकोमिरेहाजत-ए-रफ़ूक्याथी
तुम्हेंशिकायत-ए-अहल-ए-वतनहैक्यूँँसाहब
ख़ुदअपनेशहरमें'ग़ालिब'कीआबरूक्याथी
  - Akbar Ali Khan Arshi Zadah
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