ro ro ke bayaañ karte firo ranj-o-alam khoob | रो रो के बयाँ करते फिरो रंज-ओ-अलम ख़ूब

  - Ajmal Siddiqui
रोरोकेबयाँकरतेफिरोरंज-ओ-अलमख़ूब
हासिलनहींकुछभीजोहोरंग-ए-क़लमख़ूब
बाज़ारमेंइकचीज़नहींकामकीमेरे
येशहरमिरीजेबकारखताहैभरमख़ूब
मंज़िलतोकिसीख़ासकोहीमिलतीहै,वर्ना
देखेतोसभीनेहैंमिरेनक़्श-ए-क़दमख़ूब
येठीकहैरिश्तेमेंबँधारहताहैअबदिल
इसकाबेमेंहोताथाकभीजश्न-ए-सनमख़ूब
  - Ajmal Siddiqui
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