zindagi roz banaati hai bahaane kya kya | ज़िंदगी रोज़ बनाती है बहाने क्या क्या

  - Ajmal Siddiqui
ज़िंदगीरोज़बनातीहैबहानेक्याक्या
जानेरहतेहैंअभीखेलदिखानेक्याक्या
सिर्फ़आँखोंकीनमीहीतोनहींमज़हर-ए-ग़म
कुछतबस्सुमभीजतादेतेहैंजानेक्याक्या
खटकेंइसआँखमेंतोधड़केंकभीउसदिलमें
दर-ब-दरहोकेभीअपनेहैंठिकानेक्याक्या
बोलपड़तातोमिरीबातमिरीहीरहती
ख़ामुशीनेहैंदिएसबकोफ़सानेक्याक्या
शहरमेंरंगजमागाँवमेंफ़सलेंउजड़ीं
हश्रउठायाबिनामौसमकीघटानेक्याक्या
ख़्वाबउम्मीदकाहक़,आहकाफ़रियादकाहक़
तुझपेवारआएहैंयेतेरेदिवानेक्याक्या
  - Ajmal Siddiqui
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