kyun kahooñ koi qad-aavar nahin aaya ab tak | क्यूँँ कहूँ कोई क़द-आवर नहीं आया अब तक

  - Ajiz Matvi
क्यूँँकहूँकोईक़द-आवरनहींआयाअबतक
हाँमिरेक़दकेबराबरनहींआयाअबतक
एकमुद्दतसेहूँमैंसीना-सिपरमैदाँमें
हमला-आवरकोईबढ़करनहींआयाअबतक
येतोदरियाहैंजोआपेसेगुज़रजातेहैं
जोशमेंवर्नासमुंदरनहींआयाअबतक
होंगेमंज़िलसेहम-आग़ोशयेउम्मीदबंधी
रास्तेमेंकोईपत्थरनहींआयाअबतक
क्याज़मानेमेंकोईगोश-बर-आवाज़नहीं
कोईभीदिलकीसदापरनहींआयाअबतक
जानेक्याबातहैसाक़ीकितिरीमहफ़िलमें
जोगयाबढ़वोपलटकरनहींआयाअबतक
इंतिहायेहैकिपथरागईंआँखेंअपनी
सामनेवोपरी-पैकरनहींआयाअबतक
क्याकरिश्माहैदुर-ए-अश्क-ए-मोहब्बतअपना
सदफ़दुर-ए-चश्मसेबाहरनहींआयाअबतक
मुंतज़िरहूँमैंकफ़नबाँधकेसरसे'आजिज़'
सामनेसेकोईख़ंजरनहींआयाअबतक
  - Ajiz Matvi
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