dard-e-musalsal se aahon men paida vo taaseer hui | दर्द-ए-मुसलसल से आहों में पैदा वो तासीर हुई

  - Ajiz Matvi
दर्द-ए-मुसलसलसेआहोंमेंपैदावोतासीरहुई
अक्सरचारागरोंकीहालतमुझसेसिवागम्भीरहुई
क्याजानेक्यूँँमुझसेमेरीबरगश्तातक़दीरहुई
मम्लिकत-ए-ऐशआँखझपकतेहीग़मकीजागीरहुई
उसनेमेरेशीशा-ए-दिलकोदेखकेक्यूँँमुँहमोड़लिया
शायदइसआईनेमेंउसकोज़ाहिरकोईलकीरहुई
जबभीलिक्खाहाल-ए-दिल-ए-मुज़्तरमैंनेउसकोरातगए
ता-ब-सहरअश्क-अफ़्शानीसेज़ाएअ'वोतहरीरहुई
बढ़तीजातीहैदूरी-ए-मंज़िलजबसेजुनूँनेछोड़ासाथ
अबतोख़िरदहरगामपरअपनेपैरोंकीज़ंजीरहुई
मुझकोअताकरतेवोयक़ीननमेरीतलबसेसिवालेकिन
ख़ुद्दारीमेंहाथफैलाशर्मजोदामन-गीरहुई
किसकोख़बरहैउनकीगलीमेंकितनेदिलोंकाख़ूनहुआ
रा'नाईमेंउनकीगलीजबवादी-ए-कश्मीरहुई
उनसेकरूँँइज़्हार-ए-तमन्नासोचारखकरउज़्र-ए-जुनूँ
लेकिनवोभीरासआयाला-हासिलतदबीरहुई
टप-टपआँखसेआँसूटपके'आजिज़'आह-ए-सर्दकेसाथ
मेरेसामनेनज़्र-ए-आतिशजबमेरीतस्वीरहुई
  - Ajiz Matvi
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