padho ibaarat-e-takhleeq-e-dard chehre par | पढ़ो इबारत-ए-तख़्लीक़-ए-दर्द चेहरे पर

  - Ainuddin Azim
पढ़ोइबारत-ए-तख़्लीक़-ए-दर्दचेहरेपर
लिखीहैकर्बकीरूदादज़र्दचेहरेपर
छुपारहीहैख़द-ओ-ख़ालझुर्रियाँबनकर
जमीहुईथीसफ़रमेंजोगर्दचेहरेपर
कमाल-ए-ज़ब्ततोयेहैकिरंग-ए-मायूसी
दम-ए-शिकस्तभीझलकेमर्द-चेहरेपर
पिघलतीक्यूँँभलाबर्फ़अज्नबिय्यतकी
नज़रकीधूपजोठहरीथीसर्दचेहरेपर
मैंधूलअहल-ए-चमनमेरीक़द्रक्याजानें
मुझेसजातेहैंसहरा-नवर्दचेहरेपर
हरएकजिस्मबरहनालगेवहाँ'आज़िम'
जहाँनक़ाबरखेफ़र्दफ़र्दचेहरेपर
  - Ainuddin Azim
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