surkh-roo sab ko sar-e-maqtal nazar aane lage | सुर्ख़-रू सब को सर-ए-मक़्तल नज़र आने लगे

  - Ainuddin Azim
सुर्ख़-रूसबकोसर-ए-मक़्तलनज़रआनेलगे
जबहुएहमआँखसेओझलनज़रआनेलगे
शहरवालोजानलेनागाँवमेरागया
बच्चियोंकेसरपेजबआँचलनज़रआनेलगे
हमनेमाँगीभीदुआ-ए-अब्र-ए-रहमतकिसघड़ी
जबसरोंपरज़ुल्मकेबादलनज़रआनेलगे
आइनेपरआजकेजमनेदेमाज़ीकीधूल
ताकितेराआनेवालाकलनज़रआनेलगे
हमवहाँतकभीपहुँचेजिसबुलंदीसेगिरे
जबकिपिछड़ेलोगभीअव्वलनज़रआनेलगे
लोगतोकहतेथे'आज़िम'येकभीफलतीनहीं
ज़ुल्मकीटहनीपेकैसेफलनज़रआनेलगे
  - Ainuddin Azim
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